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Department of Veterinary Surgery & Radiology
College of Veterinary and Animal Sciences
Himachal Pradesh Agriculture University, Palampur- 176062

 

An Initiative under Rashtriya Krishi Vikas Yojana (RKVY)

 
    
 
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बेबसाइट का किसान अड्डा सतंभ विशेषकर किसान व पशुपालक भाइयों व बहनों के लिए निर्मित किया गया है | इस सतंभ में लेखकों ने पिछले १० साल में पत्रों द्वारा पूछे गये किसान भाइयों के प्रश्नों को संग्रहित किया गया है |
               आशा है कि किसान भाइयों को रोज़ाना आने वाली समस्याएँ व पशु पालन सम्बन्धी एकत्रित जानकारी पसंद आएगी |


                                                                                     लेखक व संग्रहकर्ता 
                                                                                      १. डा॰ आदर्श कुमार
                                                                                      २. डा॰ मुकुल कायस्थ

  नथुनों मे पानी अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक |

 चिचड़ी ज्वर के लक्ष्ण |

 पशु को स्वयं बनाकर दें खुराक |

 सफाई ना रखने से संक्रमण की समस्या

 प्रसव के उपरांत गाय को काढ़ा पिलाएं |

 शल्य चिकित्सा से हर्निया का इलाज संभव |

 चारा डालने से पहले पशु को पिलाएँ पानी |

 पशुओं में भिड़ने से होता है टार्सन रोग |

 फोड़ा होने पर तुरंत पशु चिकित्सक़ की सलाह लें |

 संक्रामक रोग होने पर तुरंत पशु चिकित्सक़ की सलाह लें |

 गाभिन पशु की पहचान कैसे हो ?

 स्वास्थ्य के साथ-साथ पैसा भी ..

 गर्भावस्था में पशु की खुराक पर ध्यान दें |

 घाव पर मक्खी-मच्छर ना बैठने दें |

 समय-समय पर पशु की जांच करवाएँ |

 सूजन पर आयोडेक्स लगाएं |

 गाय गर्भधारण नहीं कर रही, क्या करूँ ?

 पशु के पीड़ित अंग की मालिश करें |

 पशु के दाँतों का ख्याल रखें |

 पशुओं में गर्भपात के कारण |

 पशुओं को लगने वाले टीके |

 बछड़े की देखभाल |

 गर्भवती गाये को दें अधिक खुराक |

 दूध के साथ खून आना बीमारी के लक्षण |

 सही ढंग से करें मेंढे की रखवाली |

 बैल के शरीर पर जख्म है, क्या करूँ ?

 गाय गर्भ धारण नहीं कर रही , क्या करें ?

 गाय दूध कम देती है, परेशान ना हों |

 परजीवी रोग से कमजोर हो जाता है पशु |

 गर्मी में लू ना लगने दें मेंढे को |

 गाय के गोबर से बनाएँ धूप |

 गर्भित पशु को दें पौष्टिक आहार |

 ज्न्म के एक़ सप्ताह बाद निकालें पशु के सींग |

 रसौली का कारण भी बन सकता है एक छोटा सा मस्सा |

 गर्भ ठहरने के बाद पशु का रखें बिशेष ध्यान |

 पशुओं के मुँहखुर की बीमारी से हूँ परेशान |

 नाक की रसौली परजिवियों से |

 पशु के बजन की जाँच जरूरी |

 चारा सुखाने का तरीका |

 पेट दर्द होने पर पशु को सूखा आहार न खिलाएँ |

 दूषित आहार बीमारियों का घर |

 कीटाणुओं से फैलता है लंगड़ा बुखार |

  लीबर में कीड़े, तुरन्त लें चिकित्सकीय सलाह लें |

 गर्म इलाक़ों में एंथ्रेक्स की अधिक संभावना |

 पेट में अफारा गैस का लक्षण|

 पशु को सांप काटे तो तुरंत इलाज़ करवाएं |

 15 दिन के भीतर निकालें बछिया के सींग |

 सही उपचार न होने पर पशु बाँझ भी हो सकता है |

 नियमित सफाई से नही रुकता गाये के थनों से दूध |

 पशु का जितना अधिक वजन उतनी अधिक दें खुराक |

 गाये व भैंस में मद्काल के लक्षण |

 बर्षा ऋतु में गलघोंटू अधिक की समस्या |

 पशुओं का टीकाकरण कब ?

 पशु को आहार में दाना जरूर खिलाएं |

 कृत्रिम गर्भधान के लाभ |

 गर्भाशय में संक्रमण, साफ सफाई पर ध्यान जरूरी |

 गाये के प्रसव का समय बच्चे के विकास पर निर्भर |

 सूजन या घाव होने पर पशु की तुरंत जाँच करवाएं |

 पशु आहार में यूरिया अति आवश्यक |

 पशु के घुटनों की सूजन पर गर्म सेंक दें |

 परजीवी माइटस् के कारण होता है चरम रोग |

 कुत्ते के काटने से भी पशु को हो सकता है, रेबीज़ रोग |

 गाभिन पशु की देखभाल |

 ज़्यादा लाभ के लिए चूजों की देखभाल ज़रूरी |

 प्रशिक्षित व्यक्ति से ही करवाएँ टीकाकरण |

 रसौली को अनदेखा ना करें |

 घाव भरने के लिए तारपीन के तेल का इस्तेमाल करें |

 सफाई पर ध्यान देना ज़रूरी |

 सुविधाजनक उपाए कृत्रिम |

 दूध उबालने पर फट जाता है, क्या करूँ ?

 चारे में फंगस बीमारी का कारण |

 स्वच्छ और सुविधाजनक गौशाला |

 तेज बुखार , तुरंत पशु का इलाज करवाएं |

 थनों में रसौली तुरंत इलाज करवाएं |

 पशु की परजीवियों से सुरक्षा |

 पशुओं का गर्भ परीक्षण ज़रूरी |

 पसंतुलित आहार पर ध्यान देना ज़रूरी|

 पशु को हर्निया, तुरंत इलाज करवाएं |

 जख्म की जाँच के लिए परीक्षण ज़रूरी |

 नवजात बछड़े की खुराक |

 गर्भबती गाये की खुराक का ध्यान रखें |

 प्रसव के लिए स्वच्छ वातावरण जरूरी |

 लंगड़ा बुखार से बचाएँ अपने पशुओं को |

 स्वच्छता ही थनेैला रोग का उपचार |

 बीमार पशु को ठोस आहार ठीक नहीं |

 पशुपालक बदलते मौसम के प्रति सावधान रहें |

  प्रसव के समये ध्यान रखने योग्य बातें |

 नवजात बछड़े की देखभाल |

 बदलते मौसम में सावधान रहें पशुपालक |

 इलाज के बिना बांझ भी बन सकता है पशु |

 बीमारियाँ रोकता है कृत्रिम गर्भाधान |

 छोटे से आपरेश्न से ठीक हो सकती है लसीड़|

 पहाड़ी पशुओं में होती है रक्त्मेह की बीमारी |

 पहाड़ी पशुओं में होती है मूत्र रक्त्मेह की बीमारी |

 तंदुरुस्त पशु के लिए ज़रूरी है खनिज लवण |

 बीमार पशु को दूषित आहार न खिलाएँ

 समय समय पर टीकाकरण ज़रूरी |

 गाभिन पशु की खुराक का ध्यान रखें |

 भेड़ व मेमने के ख़ान पान संबंधी जानकारी |

 गर्भधारण के लिए पशु को उचित आहार ज़रूरी |

 जानवरों को अंत कृमि रोग से बचाएँ |

 गालघोनटू से बचाव के उपाए बताएं |

 पशुओं को व्यायाम भी करवाएं |

 घोड़े के प्रतिदिन घटते वजन के लिए उपचार बताएं |

 चारा न खा पाने का कारण दाँत भी |

 अत्यधिक फीड से बिगड़ सकता है पशु का स्वास्थ्य |

 पशु को गंदगी से दूर रखें |

 हाएपोडरमा मक्खी से बनती हैं गिलटियां |

 सर्दियों में पशुओं को लगने वाले रोग |

 प्रदूषित चारा खाने पर पनपते हैं कीटाणु |

 साल में तीन बार करवाएँ पशुओं की डिवार्मिग् |

 कृत्रिम गर्भाधान के बाद भी जारी रखें अतिरिक्त फीड |

 पेट में कीड़ों के वजह से लगते है पशु को दस्त |

 रंभाने के लक्षण आने पर करवा सकते हैं कृत्रिम गर्भाधान

 प्रसूति के बाद पशु का दूध निकलना ज़रूरी |

 गरमाने के लक्षण आने पर दोवारा भी हो सकता है कृत्रिम गर्भाधान |

 गाभिन पशु को जरूर दें पेट के कीड़ों की दवाई |

 गर्भधारण के लिए पशु को हरा चारा खिलाना ज़रूरी |

 संतुलित आहार देने से होती है दूध उत्पादन मे वृदॄि |

 गर्भपात होने के तीन महीने तक ना करवाएँ कृत्रिम गर्भाधान |

 प्रसूति के ४०-८० दिन पहले बदं कर दें पशु से दुध निकालना |

 कमज़ोरी की बजह से आते है पशुओं को चक्कर |

 खून की सप्लाई कम होने से होती है उहल में सोज़िश |

 गाभिन पशु में भूख की कमी होने पर करवाएँ शीघ्र जाँच |

 एलर्जी की बजह से होती है पशुओं को खारिश व फुंसियाँ|

  कृत्रिम गर्भाधान के बाद भी पशु गरमाये तो करवाएँ जाँच |

 गर्भाधान न होने पर भी प्रयोग कर सकते है पशु का दूध|

 फस्फोरस की कमी होने पर खाते है मिट्टी पशु |

 गरमाने के लक्षण देखते ही करवाएँ कृत्रिम गर्भाधान |

 कृत्रिम या प्राकृतिक गर्भाधान के दो महीने बाद ज़रूरी है पशु की जाँच |

 पशु के पूरी तरह तैयार होने पर ही करवाएँ गर्भाधान |

 गर्भश्य में संक्रमण होने से दूध कम देता है पशु |

 पशु का उलह सख़्त होने प्र करवाएँ डाक्टर से जाँच |

 पशु प्रसूति के पशु को दलिया व पशु आहार एक साथ ना दें |

 प्रसूति से डेढ़ महीना पहले सूखा दें पशु का दूध |

 कमज़ोरी की वजह से कम देता है पशु दूध |

 संतुलित आहार देने से आसान होती है पशु की प्रसूति |

 डाक्टर की सलाह से दें गाभिन पशु को पेट के कीड़ों की दवा |

 दूध में बढ़ोतरी क लिए गाभिन पशु की देखभाल ज़रूरी |

 उचित समय आने पेर ही करवाएँ पशु का कृत्रिम गर्भाधान |

 फुलणू खाने से होता है पशुओं को पीलिया रोग |

 पशु क मूत्र में खून आने पर करवाएँ शीघ्र इलाज़ |

  प्रसूति से पहले भी जारी रखें गाभिन पशु का आहार |

 जेर खाने से न्ही होती पशु के दूध मे कमी |

 बसा की मात्रा ज़्यादा होने पर गाढा़ दूध देता है पशु |

 परीक्षण के बाद ही दें पशु को गरमाने की दवाई |

 तीसरे दिन से ही पिलाएँ नवजात बछड़े / बछड़ी को पानी |

 पशु क दूध में वृधि करती है अलसी की खल |

 दूध कम ना होने पर भी गाभिन हो सकता है पशु |

 पशु के उहल में सोजिश होने पर बच्चे को अलग से पिलाएँ दूध |

 गाभिन पशु का सात महीने बाद दोवारा परीक्षण करवाना ज़रूरी |

 प्रोजेस्टरन हारमोन की वजह से होता है पशु का बार बार गर्भपात |

 प्रसूति के बाद बच्चेदानी से मवाद न निकलने से बनता है दूध विषैला |

 डाक्टर की सलाह के बाद ही दें पशु को गरमाने की दवाई |

 सात - आठ साल की उम्र के बाद ना करवाएँ कुतिया का प्रजनन |

 हरी मेंहदी और अलसी का तेल लगाने से दूर होता है फुलबहरी का रोग |

 कमज़ोरी की वजह से भांड भरता है पशु |

 उबाल कर पिएं रैबिज़ रोग से ग्रस्त पशु का दूध |

 पशु के उहल में सोजिश होने पर करें गर्म पानी से सेंक |

 संक्रमण के कारण होते है पशुओं को मस्से |

 चीचड़ो से छुटकारे के लिए पशुशाला में करें पैक्टोसाईड दवाई का स्प्रे |

 नेवले के काटने पर पशु लगवाएँ पशु को एंटी-रैबिज़ की टीके |

 बच्चेदानी में रसौली से आता है पशु क मूत्र मेी खून |

 कम फुलणू खाने से बच सकती है पशु की जान |

 उहल के लाल होने पर न करें गर्म पानी से सेंक |

 खुरपका - मुहपका रोग होने पर हर पशु के लिए प्रयोग करें अलग सुई |

 गाय की पुंछ सड़ने का एक मात्र इलाज़ है श्ल्य चिकित्सा |

 पेट के कीड़ों के कारण लगते है पशुओं को दस्त |

 चर्मरोग के कारण झड़ते हैं कुत्तों के बाल |

 श्ल्य चिकित्सा से करवाएँ पशुओं के लसीड़ रोग का इलाज |

 चीचड़ो से छुटकारे के लिए पशुशाला में करें पैक्टोसाईड दवाई का स्प्रे |

 बछड़े / बछड़ी के जन्म के समय कमरे की अच्छी तरह से सफाई |

 प्रसूति के दो महीने पहले दें पशु को खनिज मिश्रण |

 सातवें महीने में ही शुरू करें गभिन गाय की सेवा |

 15-18 महीने की आयु होने पर ही जर्सी गाय का क्रत्रिम ग्रभाधान |

 दूध उत्पादकता बनाए रखने के लिए पशु को खिलाएँ खनिज मिक्षण |

 कमज़ोरी की वजह से पशु भरता है भांड |

 शल्य चिकित्सा से करवाएँ कुत्ते का बंधययकरण |

 मैग्रिशियम की कमी से होती है नवजात बछड़ों मे कापनें की बीमारी |

 सख़्त गोबर आने पर पशु को पिलाएँ गर्म पानी |

 गर्भाशय में संक्रमण से आता है पशु में बदबूदार मवाद |

 खनिज मिक्षण की कमी से होती है कुत्तों मे खुजली व बाल झड़ने की बीमारी |

 गरमाने के 12-18 घंटों के बाद करवाएँ पशु का क्रत्रिम गर्भधान |

 पशु की प्रसूति के दो महीनों बाद दोबारा हो सकता है क्रत्रिम गर्भधान |

 पशु की प्रसूति के बारह घंटे बाद भी जेर ना फेकनें पर करवाएँ जाँच |

 पशुओं में दुग्ध ज्वर होने पर करवाएँ पशु चिकित्सक से जाँच |

 प्रसवोत्तर अमद अवस्था होने पर पशु को प्रतिदिन दें तीन-चार किलो आहार |

 प्रसूति के आख़िरी दो महीनो में सुखा दें पशु का दूध |

 पशु के खुजली करने पर लगवाएँ एविल का इंजेक्सन |

 बचडियों के सींग निकलवाने की उपयुक्त उम्र 8-15 दिन |

 प्रसूति से 45-60 दिन पहले सुखा दें पशु का दूध |

 गभिन पशु की करें पर्याप्त देखभाल |

 पागल कुत्ते के काटने पर अपने डोगी को लगवाएं 14वें व 15वें दिन टीके |

 बच्चेदानी में खून की सॅप्लाइ ना पहुचने के कारण आती है उहल में सोज़िश |

 प्रसूति के बाद ज़रूरी है पशु को एंटीबायोटिक |

 कच्चा दूध पीने से रैबीज का ख़तरा |

 शल्या चिकित्सा से ही ठीक होगा भैंस का लंगड़ापन |

 पुंछ पर कीड़ा लगने पर शीघ्र करवाएँ पशु का इलाज |

 जीभ पकड़कर ना पिलाए सिरका |

 जेर से पशु को कोई नुकसान नहीं |

 गाय को प्रसूति के बाद 15 दिन तक ही पिलाएँ दलिया |

 अगर बछडी के खून में बदबू हो तो डॉक्टर से संपर्क करें |

 पशु में केयैलसियियम की कमी से होता है दुग्धज्वर |

 पशु को खाँसी होने पर दें पेट के कीड़े की दवाई |

 दस्त लगने पर बछडी को सुबह शाम दें सोडा |

 गाय को आईड्रॉप्स से फ़र्क ना पड़ें तो जाएँ चिकित्सक के पास |

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